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नज़्म

मिला लो दिल से दिल या टुकड़े हजार कर दो

हो जाओ रुखसत जिंदगी से मेरी या मुझे अपना तलब गार कर दो


छोड़ दो तन्हा सफर में यह ताउम्र का साथ कर दो

बन जाओ हिज्र का दिन तुम या वस्ल की रात कर दो


भुला दो वह लम्हे सारे या हक उनका अदा कर दो

कफन पहना दो मोहब्बत को यह सरेआम बेपर्दा कर दो


तोड़ दो तुम एतबार मेरा या मोहब्बत का इजहार कर दो

ले लो तुम जान मेरी या मुझ पर जान निसार कर दो


छीन लो मुझसे वजूद मेरा या मुझे अपने गमों का मेजबान कर दो

बेदखल कर दो दिल से अपने या मुझ पर दिल कुर्बान कर दो

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